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पड़ोसी भाभी की चुदाई

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम राज है और में जयपुर के पास एक गाँव से हूँ। मुझे बहनों और चाचीओं में बहुत दिलचस्पी है। मैंने भाभी की चूत या किसी आंटी की चूत को चोदने का कोई मौका नहीं छोड़ा। आज मैं आपके सामने एक और सच्ची घटना लेकर आया हूँ। इससे पहले कि मैं कहानी को आगे बढ़ाऊं, मैं आपको अपने बारे में कुछ हल्की जानकारी देना चाहता हूं। मेरी उम्र 34 साल है और मेरा शरीर काफी फिट है। मैं रोजाना व्यायाम के लिए भी समय निकालता हूं। यह मेरी दिनचर्या का हिस्सा है। तो दोस्तों, यह दो साल पहले की बात है। उस समय मैं एक कंपनी के टेंडर के रूप में जयपुर गया था। मैं वहाँ किराये का कमरा लेकर रह रहा था। पास में एक खूबसूरत भाभी थी जो देखने में बहुत हॉट लगती थी। गर्म से मेरा मतलब यह नहीं है। हॉट एक महिला को अपना स्टाइल बनाता है, मेरा ऐसा मानना ​​है। वो भाभी भी मेरी तरह दिखने में थोड़ी मोटी थी। सूखी महिलाएं मुझे ज्यादा आकर्षित नहीं करती हैं। मैं थोड़ा स्वस्थ बहनों में ज्यादा दिलचस्पी रखता हूं। तो उस भाभी की उम्र करीब 37 साल थी। वह उससे कम दिखती थी। मुझे बाद में उम्र का पता चला, लेकिन मैं आपकी जानकारी के लिए यहां पहले ...

बड़ी बहन को नंगी नहाती देखा (भाई के लंड से दीदी की चुत गांड चुदाई)


हॉट दीदी सेक्स स्टोरी में पढ़ें कि मेरी बड़ी बहन बहुत सेक्सी है. मैं उसे चोदना चाहता था. एक बार वो नहाने गयी तो मैं दरवाजे के छेद में से देखने लगा. क्या दिखा मुझे?



यह हॉट दीदी सेक्स स्टोरी मेरी और मेरी बड़ी दीदी के बारे में है.

मैं पूरा जवान हो चुका हूँ और 12 वीं क्लास में पढ़ता हूं.


मेरे घर में मेरे पापा मम्मी और मेरी बड़ी दीदी रहती हैं.

मेरी दीदी ने ग्रेजुएशन पूरा कर लिया है और अभी वो घर के ही काम करती हैं.


दीदी दिखने में बहुत अच्छी हैं और गोरी हैं. उनकी चुचियां भी बहुत बड़ी हैं और एकदम मक्खन सी गोरी हैं.

मेरी दीदी की फिगर साइज 34-28-36 के करीब की है. वो देखने में बहुत मस्त माल हैं.

जब दीदी झुकती हैं, तब गहरे गले के कुर्ते से उनकी चूचियां बाहर आकर दिखने लगती हैं.


एक दिन अन्तर्वासना पर भाई बहन की सेक्स कहानी पढ़ते हुए मुझे भी मेरी दीदी को चोदने का और उनकी चूचियां दबाने का बहुत मन कर रहा था.

मैंने सोच लिया था कि एक बार तो दीदी की चूची और चुत को अपने लंड से मिलवाना ही है.


हमारे घर में दिन में हम दोनों ही अकेले ही रह जाते हैं क्योंकि मेरे मॉम और मेरे डैड नौकरी करते हैं.

वो दोनों अपनी नौकरी की वजह से सुबह घर से निकल जाते हैं और शाम को ही वापस आते हैं.


घर का सारा काम मेरी दीदी ही करती हैं. सब काम करने के बाद ही दीदी नहाने के लिए जाती हैं फिर मैं और दीदी एक साथ खाना खाते हैं.

शाम को कमोवेश यही होता है बस उस समय मॉम भी दीदी के साथ काम करती हैं.


एक संडे के दिन मेरे मॉम और डैड को कहीं किसी रिश्तेदार के यहां जाना था.

वे लोग सुबह 7:00 बजे निकल गए. घर में मैं और मेरी दीदी बस अकेले रह गए थे.


दीदी घर में सब काम करने लगीं और काम करने के बाद रोज के नियमानुसार वो स्नान करने अपने बाथरूम में चली गईं.


उनके बाथरूम में जाने के बाद मैं भी उनके पीछे-पीछे बाथरूम के पास खड़ा हो गया.

दीदी को नहाते हुए देखने का मेरा मन होने लगा. मैं कोई झिरी या छेद देखने लगा जिधर से मैं दीदी की नंगी जवानी का दीदार कर सकूँ.


जल्द ही मुझे एक छोटा सा छेद नजर आ गया और मैंने उस छेद में से अन्दर झांकना शुरू कर दिया.


अन्दर मेरी दीदी एकदम नंगी होने लगी थीं और कपड़े उतारते समय बड़ी मस्त माल लग रही थीं.


दीदी ने अपनी कुर्ती निकाल दी. उसके बाद दीदी के मम्मे रेड कलर की ब्रा में फंसे हुए दिखने लगे.


सच में दीदी लाल रंग की ब्रा में क्या माल लग रही थीं.

मैं उनके मम्मों को देखते ही गर्म हो गया और मेरा लंड खड़ा हो गया.


उसके बाद दीदी ने अपनी पजामी का नाड़ा खोला और उसे नीचे करते हुए उतार दिया.

मेरे सामने दीदी ब्लैक कलर की पेन्टी में थीं.

सच में लाल ब्रा और काली पैंटी में दीदी मस्त कांटा माल लग रही थीं.


मैं बाहर खड़ा ये सब देख रहा था और अपने लंड की मुठ मार रहा था.


कुछ पल के बाद दीदी ने अपनी ब्रा और पैंटी भी निकाल दी.

पैंटी निकालने के बाद वो मेरी तरफ पीठ करके हो गई तो उनकी मखमली गांड मुझे और भी अधिक उत्तेजित करने लगी थी.


मैं हॉट दीदी की गांड मारने की सोचने लगा कि दीदी को कुतिया बना कर उनकी गांड मारूंगा तो मजा आ जाएगा.


दीदी की बड़ी गांड जगमग जगमग हो रही थी.


तभी दीदी ने एक बट प्लग टाइप का कुछ नुकीला सा निकाला और उसको मुँह में लेकर चूसने लगीं. इस तरह का बट मैंने एक ब्लू-फिल्म में देखा था. उस फिल्म में पोर्न ऐक्ट्रेस ने अपनी गांड में उस बट को फंसा लिया था और आगे अपनी चुत में लंड लेकर चुद रही थी.


मैं उस बट प्लग को देख कर एकदम सनाका खा गया कि मेरी हॉट दीदी भी कुछ ऐसा ही करने वाली हैं.


यही हुआ दीदी ने कुछ देर बट प्लग को अपने थूक से गीला करने के बाद उसे अपनी गांड में लेना शुरू कर दिया.


इस समय दीदी सामने वाशबेसिन से अपने शरीर को झुकाए हुए पीछे हाथ करके अपनी गांड में प्लग ले रही थीं.


फिर उन्होंने धीरे धीरे पूरा बट प्लग अपनी गांड में ले लिया और पलट गईं. उनकी फूली हुई चुत मेरे सामने थी.


दीदी ने बाथरूम का पंखा चालू कर दिया, जिससे बाथरूम की हवा बाहर कोर्टयार्ड में निकलने लगी.


फिर दीदी ने अपनी छिपी हुई जगह से एक सिगरेट की डिब्बी और लाइटर निकाला और सिगरेट सुलगा कर कश लेने लगीं.

सिगरेट का धुंआ पंखे की वजह से बाहर निकलने लगा.


अब हॉट दीदी ने अपनी चुत में उंगली करना शुरू कर दी. मतलब इस समय दीदी अपनी चुत और गांड में एक साथ मजा ले रही थी.


मुझे ये सीन देख कर एकदम से झुरझुरी सी आ गई और मेरा लंड इतना कड़क हो गया था कि मुझसे रहा नहीं जा रहा था.


कुछ देर बाद दीदी ने हांफी भरना शुरू कर दिया और मैं समझ गया कि दीदी अब झड़ने वाली हैं.


मैंने भी अपने लंड का सड़का मारा और अपना माल लंड से बाहर निकलने से पहले ही उसे अपनी मुट्ठी में जकड़ लिया क्योंकि इधर माल गिराने से गड़बड़ हो जाती.


मैं लंड दबाए हुए दूसरे बाथरूम में चला गया और उधर लंड का माल गिरा कर खुद की सांसों को नियंत्रित किया.


मेरे दिमाग में दीदी की चूचियां चुत और बड़ी सी गांड ही घूम रही थी.


मैं दीदी को आवाज देता हुआ घर बाहर जाने की कह कर निकल गया.


बाहर जाकर मैंने एक सिगरेट पी और दीदी को याद करके धुंआ उड़ाने लगा.


कुछ देर बाद जब मैं घर आया, तो दीदी कमरे में थीं.

दीदी ने पूछा- किधर गया था.


मैंने कुछ नहीं कहा, तो दीदी ने मेरे पास आकर मेरे मुँह से आती सिगरेट की गंध को सूंघा और बोलीं- सिगरेट पी है तूने?


मैं सिगरेट पीता था, ये बात दीदी को मालूम थी लेकिन उन्होंने कभी कहा नहीं था.

पर आज उन्होंने मुझसे सीधे सीधे पूछ लिया था.

मैंने कोई उत्तर नहीं दिया.


दीदी बोलीं- मेरा मन भी है … तेरे पास एक्स्ट्रा है क्या?

मैं दीदी की बात सुनकर चौंका … फिर मैंने कहा- नहीं है … आप कहो तो लेकर आऊं?


दीदी ने सौ का नोट दिया और बोलीं- हां एक डिब्बी ला दे. मेरी खत्म हो गई है.

मैं उन्हें देखने लगा, तो दीदी मुस्कुराने लगीं.


मैं बाहर से नेवीकट की एक डिब्बी ले आया.


घर आया तो दीदी ने खाना परोसा और हम दोनों ने खाना खा लिया.


फिर दीदी ने मुझसे सिगरेट सुलगाने के लिए कहा.

तो मैंने एक सिगरेट जला कर उन्हें दे दी.

दीदी और मैं एक ही सिगरेट से मजा लेने लगे.


दोस्तो, इस तरह से मैं और दीदी आपस में फ्रेंक होने लगे थे.


सिगरेट के दौरान ही दीदी ने मुझसे ड्रिंक के बारे में पूछा तो मैंने ना में सर हिला दिया. जबकि मैं पीता हूँ.


दीदी बोलीं- बियर पिएगा?

मैंने झूठ कहा- मैंने कभी पी नहीं है.


दीदी बोलीं- मन है?

मैंने कहा- ट्राई कर लेता हूँ.


दो बियर कैन लाने के लिए दीदी ने मुझे पैसे दिए और मैं ले आया.


दीदी ने बियर कैन खोल कर चियर्स किया और हम दोनों बियर पीने लगे.

एक एक सिगरेट का मजा भी लिया और हम दोनों में खुल कर बातचीत होने लगी.


दीदी ने मुझसे मेरी गर्लफ्रेंड के बारे में पूछा, तो मैंने ना कह दी.

मेरे मन में तो मेरी दीदी ही मेरी गर्लफ्रेंड थीं.


मैंने दीदी से उनके ब्वॉयफ्रेंड के बारे में पूछा, तो वो सिर्फ मुस्कुरा कर रह गईं.


हम दोनों में अब खुलापन होने लगा था. हम दोनों एक ही कमरे में सोते थे तो रात को अक्सर बियर और सिगरेट का मजा लेना शुरू हो गया था.


हमारे कमरे में एक खिड़की थी, जिसे खोल कर सिगरेट का धुंआ बाहर निकल जाता था. मॉम डैड को इसकी खबर तक न हो पाती थी.


मैं अक्सर सोचता रहता था कि दीदी को किस तरह से अपने मन की बात कहूँ कि आपको चोदने का मन है.


फिर एक दिन मेरी मॉम और डैड को कहीं बाहर जाना था.

जब मैं घर आया तब वो सब पैकिंग कर रहे थे. मेरी दीदी भी पैकिंग में मदद कर रही थीं.


मैंने पूछा- आप लोग कहीं जा रहे हैं?

मेरी दीदी ने कहा- मॉम डैड को एक हफ्ते के लिए दिल्ली जाना है.


ये सुनकर मेरे मन में लड्डू फूटने लगे और मैंने दीदी की तरफ देखा तो दीदी ने भी आंख दबा कर मुस्कान दे दी.

मैं समझ गया कि अब खुल कर मस्ती करने का मौक़ा आ गया है.


दीदी पैकिंग कर रही थीं और वो पैकिंग करते करते कभी-कभी इतना ज्यादा झुक जाती थीं कि उनकी चूचियां पूरी बाहर आ जाती थीं.


मैं उनकी चूचियों को देखता रहा था. दीदी की चूचियां इतनी बड़ी थीं कि वो गहरे गले की कुर्ती से बाहर आ रही थीं.

मुझे दीदी की चूचियां देखने में बहुत मजा आ रहा था.


हालांकि मेरी नजरों को दीदी ने देख लिया था, मगर उन्होंने कुछ नहीं कहा और वो बदस्तूर उसी तरह दूध दर्शन करवाती रहीं.


एक घंटे बाद की ट्रेन थी तो मैं मॉम डैड को स्टेशन छोड़ आया.


वापस आकर मैं अपने कमरे में चला गया और दीदी घर के काम में व्यस्त हो गईं.


दीदी कमरे में सफाई करने आईं … तो मैंने देखा कि वो झाडू लगाते हुए कुछ ज्यादा ही झुक रही थीं.

मैं उनके मम्मों को देखने लगा.


शायद दीदी ने मुझे अपनी चूचियां देखते हुए भांप लिया था. एक मिनट बाद तो दीदी इतना अधिक झुक गईं कि उनकी चूचियों के निप्पल भी दिखने लगे.


मैंने दीदी से कहा- दीदी अल्मारी से सिगरेट की डिब्बी दे दो.


हॉट दीदी ने मेरी तरफ वासना भरी नजरों से देखा और कहा- क्यों सिगरेट पीने का मन क्यों करने लगा?

मैंने उनकी तनी हुई चूचियों के देखते हुए कहा- बस अभी कुछ मूड हो गया है.


दीदी ने सिगरेट की डिब्बी मुझे देते हुए कहा- ले … मूड फ्रेश कर ले.


मैं सिगरेट जलाई और दीदी ने फिर से अपनी चूचियां दिखाते हुए सफाई करना शुरू कर दी.

मैंने बेख़ौफ़ दीदी की हिलती हुई चूचियों को देख रहा था और वो भी मेरी नजरों को ताड़ते हुए अपने मम्मे मुझे दिखा रही थीं.


फिर दीदी मेरे पास आकर बैठ गईं और मेरे हाथ से सिगरेट लेकर खुद पीने लगीं.


मैंने दीदी की कमर में हाथ डाला और उन्हें अपने ऊपर खींच लिया.

दीदी बोलीं- आह बड़ा थक गई हूँ … थोड़ा बदन सहला दे मेरा.

मैंने दीदी की कमर सहलानी शुरू कर दी.


पांच मिनट तक हम दोनों यूं ही एक दूसरे से लेटे बैठे ही चिपके रहे. मेरा लंड खड़ा हो गया था.


शायद दीदी ने समझ लिया था, तो वो उठ गईं और बोलीं- चल जल्दी से नहा ले … फिर साथ में खाना खाते हैं.

मैंने ओके कहा और हम दोनों उठ गए.


फिर मैं नहाया और हम दोनों ने दोपहर का खाना खाया.

उसके बाद दीदी काम करने लगीं. मैं कमरे में चला गया.


दीदी भी काम खत्म करके आ गईं. दीदी कमरे में आकर सो गईं.


मैं सोते वक्त सिर्फ चड्डी पहनकर ही सोता हूँ. लेकिन आज तो मेरा बड़ा लंड चड्डी के बाहर मुँह निकाल कर देख रहा था.


हम दोनों सो रहे थे.

तभी दीदी ने करवट बदली और वो मेरी ओर मुँह करके सो गईं. उनके चुचे उनकी बड़े गले के कुर्ते से बाहर निकलते हुए दिखने लगे थे.


मैंने दीदी के आम देखे तो मन ललचा गया. मैं सोचने लगा कि जब बाहर से आधे ही इतने मस्त दिख रहे हैं तो अन्दर से पूरे कितने मस्त और बड़े आकार के होंगे.


मैं ध्यान से मम्मों को देखने लगा. दीदी की ब्रा की पट्टी साफ दिख रही थी.


थोड़ी देर के बाद मैंने दीदी को कसके पकड़ लिया. मेरे और दीदी के होंठ आमने सामने आ गए.

अभी तक हम दोनों आपस में ऐसे कई बार मजाक करते रहते थे. पर दीदी को नहीं पता था कि आज मैं किस तरह का मजाक करने वाला हूँ.


मैंने दीदी के होंठों पर किस कर दिया.


दीदी इस वजह से जाग गईं और बोली- ये क्या कर रहे हो तुम?


मैंने अपने लंड से दीदी को झटका मारा और बोला- आज यही करना है.

दीदी- तुम पागल हो गए हो, मैं तुम्हारी दीदी हूँ.

मैं- दीदी, आज मुझे यही करना है.


वो कुछ नहीं बोलीं.


तो मैंने उनको पकड़ लिया और अपनी बांहों में खींच लिया. मेरा खड़ा लंड दीदी की गांड में चुभ रहा था.


दीदी की बड़ी-बड़ी चूचियों को मैंने पकड़ लिया और दीदी कहने लगीं- छोड़ दो यार … बहन भाई आपस में ऐसा नहीं करते.


मगर मुझे बहुत मजा आ रहा था. मैंने कहा- दीदी मुझे मजा आ रहा है … आपको भी तो आग लगती है न. मैंने देखा है.

दीदी एकदम से चौंक गईं और बोलीं- तूने कब देखा है?

मैंने कहा- जब आप बाथरूम में अपने दोनों छेदों की प्यास बुझाती हैं.


अब दीदी कुछ नहीं बोलीं और न ही उन्होंने मेरे हाथों को रोकने का प्रयास किया.


मैं उनकी गर्दन पर चूमने लगा और उन्हें गर्म करने लगा.


थोड़ी देर के बाद दीदी भी मान गईं. उन्होंने बोला कि चल आज हम दोनों ये भी कर लेते हैं.


दीदी खड़ी हो गईं और उन्होंने अपनी कुर्ती को निकाल फेंका.


आह दीदी क्या मस्त लग रही थीं. गुलाबी रंग की छोटी सी तंग ब्रा में उनकी चूचियां इतनी कसी हुई और भरी हुई लग रही थीं कि लंड हाय हाय करने लगा.


मैंने दीदी को अपने सामने इस अवस्था में पहली बार देखा था, तो उनकी चूचियों को देखकर मैं पागल होने लगा.


दीदी को मैंने अपनी बांहों में भर लिया और दीदी ने भी मुझे अपने अंक में समेट लिया.

हम दोनों यूं ही पांच मिनट तक खड़े-खड़े किस करते रहे.


दीदी ने मुझसे बोला कि आगे भी कुछ करोगे … या यूं ही समय गुजार दोगे?

मैंने कहा- दीदी मुझे तो कुछ समझ ही नहीं आ रहा है कि अब क्या करना है. मुझे तो आप इतनी खूबसूरत लग रही हो कि बस क्या बताऊं.


दीदी- ओके अब तुम मेरे पीछे आ जाओ और मेरी ब्रा का हुक खोलो.


मैं उनके पीछे गया और दीदी की पीठ पर किस करके उनकी ब्रा का हुक खोल दिया.

ब्रा ढीली हुई तो दीदी के चुचे खुली हवा में सांस लेने लगे.


मैंने दीदी को अपनी तरफ घुमा कर उनके मम्मों को देखा तो क्या उठान था … दीदी के मम्मे एकदम तने हुए मुझे ललचा रहे थे.


मैं दीदी की बड़ी-बड़ी भरी हुई चूचियां देख कर पागल हो गया और मैंने एक चूची के निप्पल को अपने मुँह में दबा कर निप्पल को खींच लिया.


दीदी की मदभरी आह निकल गई- आह आराम से चूस बेटू … लगती है … आराम से कर … आज ये दोनों आम तुम्हारे लिए ही हैं.


अब दीदी मेरे मुँह से निप्पल खींच कर बिस्तर पर लेट गईं तो मैं भी उनके बाजू में कोहनी टिका कर बैठ गया और दीदी के मम्मों से खेलने लगा.


दीदी भी मस्ती से मुझे अपनी औलाद के जैसे दूध पिलाने लगीं और मेरे सर पर हाथ फेरने लगीं.

फिर दीदी बोलीं- चल अब बहुत हो गया … अब आगे का काम देख.


मैं समझ गया और मैंने अपना लंड बाहर निकालकर दीदी के सामने लहराने लगा.


मेरा मोटा लंड देख कर दीदी की आंखें चमक उठीं और उन्होंने खुद को चित पोजीशन में करते हुए मुझे ऊपर चढ़ने का इशारा कर दिया.


मैं दीदी की टांगों के बीच में आकर उनके ऊपर बैठ गया. मैं दीदी के दोनों चुचों के बीच लंड फंसा दिया और दीदी ने अपनी दोनों चुचियों को दबाते हुए लंड को कस लिया.


मैंने अपना लंड दीदी के चुचों के बीच रगड़ते हुए दीदी को बूब फक का मजा देने लगा.


दीदी- आह मेरे दो चुचों के बीच तेरा लंड कितना गर्म लग रहा है.

मैंने कहा- हां दीदी, मुझे भी मजा आ रहा है.

दीदी बोलीं- और मजा लेना है.


मैंने समझा दीदी कि चुत में लंड के लिए कह रही हैं.


मैंने कहा- वो मजा भी लूंगा पहले आपकी चूचियों से लंड को चिकना कर लूं.

दीदी- आह लव यू मेरी जान … मगर चूचियों से गीला कैसे करेगा.


मैंने दीदी के एक चुचे पर थप्पड़ मारा और कहा- मार से अच्छे अच्छे पानी छोड़ देते हैं दीदी, ये तो साले मम्मे ही हैं.

दीदी हंस पड़ीं और बोलीं- ये ऐसे गीला नहीं होगा. मैं बताती हूँ कि लंड को कैसे रसीला किया जाता है.


उन्होंने लंड को मम्मों के बीचे तेजी से आगे पीछे करने का कहा, तो मैं करने लगा.

इस समय मेरा लंड दीदी के मुँह तक जा रहा था.


दीदी ने अपनी जीभ निकाली और लंड के आगे आते ही उसके सुपारे पर अपनी जीभ फेर दी.


आह … मुझे मानो करंट सा लगा. मैं समझ ही नहीं सका कि दीदी ने ऐसा क्या कर दिया था.

अब इस खेल का गणित मुझे अच्छे से समझ आ गया था मैंने अपने लंड को दीदी के मुँह में देते हुए बाहर खींचने लगा.


कुछ देर बाद सीधे सीधे मैंने दीदी के मुँह में लंड दे दिया और वो मेरे लंड की गोटियों को सहलाते हुए लंड चूसने लगीं.


मैं दीदी के गले तक लंड पेलने लगा.


तभी दीदी की कराह निकल गई- उउउउ उउउफ्फ ईई इ!

मैं- क्या हुआ दीदी!


दीदी- कुछ नहीं … ज्यादा अन्दर मत कर.

मैंने ओके कहा.


कुछ देर बाद दीदी ने मेरे लंड को हटा दिया और बोलीं- अब तेरी बारी है.

मैं समझ गया और मैंने दीदी को खड़ा कर दिया.


मैंने दीदी की तरफ देखा तो वो पजामी को उतारने का इशारा करने लगीं. मैंने अपने लंड में उनकी सलवार का नाड़ा बांधकर खींचा तो दीदी नीचे से नंगी हो गईं. उन्होंने नीचे पैंटी नहीं पहनी थी. दीदी ने अपनी चुत हाथों से छुपा ली.


मैंने उनके दोनों हाथों को हटा दिया. उनकी चुत पर छोटे छोटे बाल थे. मैंने खड़े खड़े ही चुत को रगड़ने लगा,


दीदी- उउउफ्फ क्या कर रहा है साले आग लग रही है.


मैंने अपने होंठ उनकी तरफ कर दिए, तो दीदी मुझे होंठों पर किस करने लगीं.


कुछ देर बाद दीदी बोलीं- अब नीचे आ जा … और मुझे जन्नत की सैर करा दे.


मैंने दीदी को 69 की पोजीशन में लेटा दिया और दीदी को अपने नीचे कर लिया. मैं उनके ऊपर चुत की तरफ मुँह करके लेट गया.


दीदी ने एक बार फिर से मेरा लंड मुँह में भर लिया और मैंने दीदी की चुत पर जीभ फिरा दी.

हम दोनों एक दूसरे के लंड चुत की चुसाई के मजे लेने लगे.


कुछ देर बाद दीदी ने मुझे चुदाई करने के लिए कहा.

मैंने सीधा होकर उनके दोनों पैर फैला दिए और उनकी चुत पर अपना लंड सैट करके अपनी बहन चोदने को रेडी हो गया.


दीदी ने गांड उठा कर शुरू करने का इशारा दिया.

और मैंने उसी समय एक झटका दे दिया. मेरा आधा लंड चुत में घुस गया.


दीदी चिल्ला पड़ीं- आआह मर गई … मम्मी रे … आह मेरी फाड़ दी साले इतना बड़ा लंड एकदम से पेल दिया हरामी उउउफ्फ मर गई.


मैंने दीदी की चिल्लपौं को नजरअंदाज किया और दूसरा झटका दे मारा.

इस बार मेरा पूरा लंड चुत की जड़ तक घुस गया.


दीदी चीखीं- ओओह आआ मर गई आह साले धीरे चोद मां के लवड़े … क्या आज ही बच्चा पैदा करके मानेगा आह फाड़ दी साले.


अपनी दीदी के मुँह से गाली सुनकर मुझे और भी अधिक जोश आ रहा था.


फिर मैं धीरे धीरे दीदी की चुत में लंड ठोकने लगा.


थोड़ी देर के बाद दीदी को भी मजा आने लगा- आउउफ्फ आआह बहुत मजा आ रहा है.


धकापेल चुदाई शुरू हो गई थी. दीदी की बड़ी बड़ी चुचियां भी हिल रही थीं.


कुछ देर बाद मैं दीदी के ऊपर लेट गया और दीदी ने मुझे बांहों में पकड़ लिया.


हम दोनों ने होंठों पर किस की.


मैंने दीदी को घोड़ी बनने के लिए कहा तो दीदी घोड़ी पोजीशन में हो गईं.


मैंने पीछे से दीदी की गांड में लंड डाला और उनके बाल पकड़कर चोदने लगा.


दीदी की चुचियां बड़ी होने की वजह से बहुत उछल रही थीं- आई उफ्फ साले गांड में पेल दिया … बहुत दर्द रहा है.

मैं- दीदी आपकी चुचियां बहुत उछल रही हैं. आपको दर्द हो रहा हो तो लंड बाहर निकाल लूं?

दीदी- नहीं … मुझे गांड में प्लग लेने की आदत है. तू कर … कुछ देर में दर्द चला जाएगा. तू पेलता रह … और चूचियां उछलेगी नहीं तो और बड़ी कैसी होंगी … तो उन्हें उछलने दे.


दस मिनट तक दीदी की गांड मारने के बाद दीदी बोलीं- तेरा हुआ नहीं? अब तक मेरा दो बार हो गया है.

मैंने कहा- मेरा अभी और चलेगा.

दीदी बोलीं- चल अब तू मुँह में आ जा.


फिर मैंने दीदी के मुँह में लंड दे दिया.


दीदी ने पांच मिनट में मेरे लंड का रस निचोड़ कर पी लिया और लंड चाटते हुए बोलीं- आह मजा आ गया. अब तू रोज मेरे मुँह में लंड देना.


कुछ देर बाद हम दोनों अलग हो गए और दीदी ने मुझसे एक सिगरेट जलाने के लिए कहा.


हम दोनों नंगे लेट कर सिगरेट का मजा लेने लगे.

इस तरह से मैंने सेक्सी दीदी की गांड मारी.


ऐसे ही मैंने दीदी से कहा- दीदी, आज रात को तो पार्टी हो जाए.

दीदी बोलीं- मतलब बियर के साथ!


मैंने कहा- नहीं आज तो व्हिस्की का मजा लेने का मन है.

दीदी बोलीं- तू तो पीता नहीं था.

मैंने कहा- मैंने आपसे झूठ बोला था.


दीदी हंस दीं और उन्होंने हां कह दी.

उस समय हम दोनों सो गए.


शाम को दीदी ने मुझे पैसे दिए तो मैं बोतल ले आया. उस रात हम दोनों ने नंगे होकर दारू पी और उस रात को दीदी की चुत में, गांड में,चुचियों में मुँह में … पर सब जगह लंड पेला और ऐसे ही एक हफ्ते तक मैंने दीदी को जमकर चोदा.


अब दीदी और मैं रोज रात में चुदाई करते हैं.

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मेरी चूत स्टोरी में पढ़े कि मेरी चूत की पहली बार चुदाई कैसे हुई. मेरा पहला बॉयफ्रेंड मुझे अपने दोस्त के कमरे में ले गया. लेकिन वो साला फिसड्डी निकला तो मैंने नया यार बना लिया. हैलो फ्रेंडज़, मेरा नाम नीलम है. मैं मध्यप्रदेश की रहने वाली हूँ. मैं एक बहुत सेक्सी लड़की हूँ और मेरा साइज 28-30-32 है. यह चूत स्टोरी उन दिनों की है, जब मैं बीएससी फर्स्ट ईयर में थी. मैं एक लड़के को बहुत चाहती थी, वो लड़का भी मुझे पसंद करता था. एक दिन बात है, जब मैं कॉलेज जा रही थी. तब मैं बस स्टॉप पर खड़ी अपनी बस का इंतजार कर रही थी. तभी मेरा ब्वॉयफ्रेंड बाइक से आया और उसने मुझे साथ चलने को कहा. मैं भी बड़ी खुशी से उसके साथ बाइक पर बैठकर कॉलेज के लिए निकल पड़ी. उसने बाइक को लम्बे वाले रास्ते से ले जाने का कहा. मैं उसके साथ मस्ती से चिपकी बैठी थी. मैंने भी उससे कह दिया कि जानी जब तू मेरे साथ है, तो क्या डर है, तू जिधर भी ले चल मैं तेरे साथ राजी हूँ. वो हंस दिया और वोला- सोच ले मेरी जान … मैं तुझे जंगल के रास्ते से ले जाने वाला हूँ. मैंने उसकी छाती से चिपकते हुए कहा- हां ले चल … मुझे कोई चिंता नहीं है. उस समय तक हमने कभी...

दीदी ने सबको बचाया ठंड में मरने से

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम हैप्पी है और मैं पंजाब का रहने वाला हूं। मेरी उम्र 23 साल है और मैं 6 फुट लंबा हूँ। इस कहानी में मैं आपको बताऊंगा कि कैसे मेरी और मेरे साथ 2 और लड़कों की जान दीदी ने कैसे बचाई। ये कहानी एक सच्ची घटना पर आधारित है और थोड़ी अटपटी है, पता नहीं आप लोगों को मज़ा आएगा या नहीं, पर मैं आपको मनोरंजित करने की पूरी कोशिश करूंगा। मेरी दीदी का नाम स्मृति है और वो 25 साल की है। उसकी लंबाई 5’4″ है। उसका फिगर 34-30-34 है। रंग गोरा है और देखने में बहुत सुंदर है। उसके पीछे हमेशा ही बहुत लड़के पड़े रहते थे और वो भी बहुत खुले मिज़ाज की लड़की थी। पहले से ही उसके कई प्रेमी रह चुके हैं तो जाहिर सी बात है कि कईयों से वो चुदवा भी चुकी है। वो अक्सर घर से बाहर ही रहती थी। वो बहुत ही आधुनिक किस्म की लड़की है। घर में भी उसे ज्यादा रोका-टोका नहीं जाता था। वो अपने समय पर घर आती और अपने समय पर चली जाती। मैं भी ऐसा ही था। पर हम दोनों एक दूसरे से सारी बातें साझा करते थे। तो एक बार हमने सोचा कि आजतक हम दोनों भाई बहन साथ में कहीं घूमने नहीं गए हैं। तो हमने हिमाचल जाने का प्लान बनाया। मम्मी-पापा ने भी हाम...